विंशोत्तरी दशा क्या है? महादशा, अंतर्दशा और क्रम

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इस लेख में
  1. दशा का क्रम और वर्ष
  2. जन्म की दशा कैसे तय होती है
  3. महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा
  4. अपनी दशा कैसे पढ़ें
  5. कुछ आम गलतफ़हमियां

विंशोत्तरी दशा का अर्थ है “120 वाली दशा”। इसमें पूरे जीवन के 120 साल को नौ ग्रहों की अवधियों में बांटा गया है। किसी भी समय आप एक महादशा और उसके अंदर एक अंतर्दशा में होते हैं। ज्योतिषी “कब होगा?” का जवाब इसी से देते हैं।

दशा का क्रम और वर्ष

क्रम ग्रह महादशा
1 केतु 7 वर्ष
2 शुक्र 20 वर्ष
3 सूर्य 6 वर्ष
4 चंद्र 10 वर्ष
5 मंगल 7 वर्ष
6 राहु 18 वर्ष
7 गुरु 16 वर्ष
8 शनि 19 वर्ष
9 बुध 17 वर्ष
कुल 120 वर्ष

बुध के बाद फिर केतु की दशा आती है।

जन्म की दशा कैसे तय होती है

जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में था, उसके स्वामी ग्रह की दशा से शुरुआत होती है:

दशा शेष: अगर जन्म के समय चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र का 40% पार कर चुका था, तो चंद्र की 10 साल की दशा में से 4 साल बीते माने जाते हैं और 6 साल बचते हैं। इसलिए सही जन्म समय ज़रूरी है।

महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा

हर महादशा में नौ अंतर्दशाएं होती हैं, उसी क्रम में, महादशा के ग्रह से शुरू होकर। अंतर्दशा की अवधि:

महादशा के वर्ष × अंतर्दशा ग्रह के वर्ष ÷ 120

जैसे शुक्र महादशा (20 साल) में शुक्र की अंतर्दशा 20 × 20 ÷ 120 = 3 साल 4 महीने की होती है। इसी नियम से अंतर्दशा में प्रत्यंतर और सूक्ष्म दशाएं बनती हैं।

हमारी मुफ़्त कुंडली में चारों स्तर दिखते हैं: महादशा पर टैप करें तो अंतर्दशाएं, और अंतर्दशा पर टैप करें तो प्रत्यंतर दशाएं खुलती हैं। अभी चल रही दशा पर निशान होता है।

अपनी दशा कैसे पढ़ें

  1. महादशा का ग्रह कुंडली में कहाँ है: किस राशि और किस भाव में। अच्छे भाव (1, 4, 5, 7, 9, 10) और मज़बूत राशि में हो तो फल अच्छा माना जाता है।
  2. वह किन भावों का स्वामी है: उसकी दशा में उन्हीं भावों के विषय सामने आते हैं।
  3. अंतर्दशा का ग्रह जोड़ें: दोनों ग्रहों का आपसी संबंध हर उप-अवधि का रंग बदलता है।
  4. गोचर देखें: शनि और गुरु का गोचर, जैसे साढ़े साती, दशा के फल को सक्रिय करता है।

ये शब्द नए हों तो पहले लग्न और कुंडली कैसे पढ़ें पढ़ें।

कुछ आम गलतफ़हमियां

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

विंशोत्तरी दशा क्या होती है?

विंशोत्तरी दशा वैदिक ज्योतिष की मुख्य समय-गणना पद्धति है। इसमें 120 साल को नौ ग्रहों की महादशाओं में बांटा गया है। जिस ग्रह की दशा चल रही होती है, वह जीवन के उस दौर की मुख्य बातें तय करता है।

जन्म के समय कौन सी दशा होती है?

जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, उस नक्षत्र के स्वामी की महादशा से जीवन शुरू होता है। चंद्रमा नक्षत्र में जितना आगे जा चुका हो, उतनी दशा बीती हुई मानी जाती है।

महादशा और अंतर्दशा में क्या अंतर है?

महादशा 6 से 20 साल की बड़ी अवधि है। हर महादशा में नौ अंतर्दशाएं होती हैं, जो उसी महादशा के ग्रह से शुरू होती हैं। अंतर्दशा के भीतर प्रत्यंतर दशाएं होती हैं।

ज्योतिष एक पारंपरिक मान्यता है। यह लेख केवल सामान्य जानकारी और मार्गदर्शन के लिए है, चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।