कुंडली कैसे पढ़ें: शुरुआत करने वालों के लिए आसान गाइड

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इस लेख में
  1. चरण 1: कुंडली की शैली पहचानें
  2. चरण 2: लग्न पहचानें
  3. चरण 3: 12 भाव पढ़ें
  4. चरण 4: हर भाव की राशि और उसका स्वामी
  5. चरण 5: ग्रहों की स्थिति देखें
  6. चरण 6: चंद्र राशि, नक्षत्र और दशा
  7. सार

कुंडली (जन्म कुंडली या जन्म पत्रिका) आपके जन्म के समय और स्थान पर ग्रहों की स्थिति का नक्शा है। अंकों और छोटे अक्षरों से भरी होने के कारण यह कठिन लगती है, लेकिन इसे पढ़ने की बुनियादी बातें छह चरणों में समझी जा सकती हैं।

पढ़ते समय अपनी कुंडली सामने रखें। अगर नहीं है, तो जन्म तिथि, समय और स्थान से मुफ़्त कुंडली बनाएं।

चरण 1: कुंडली की शैली पहचानें

सबसे आम गलती: उत्तर भारतीय कुंडली में किसी खाने में “7” का मतलब सातवां भाव नहीं, तुला राशि है।

चरण 2: लग्न पहचानें

लग्न वह राशि है जो आपके जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर उदय हो रही थी। यही पहला भाव बनती है और बाकी सभी भाव इसी से गिने जाते हैं। लग्न आपका शरीर, स्वभाव और जीवन की दिशा बताता है।

चरण 3: 12 भाव पढ़ें

भाव किसका कारक
पहला (तनु) स्वयं, शरीर, स्वभाव
दूसरा (धन) धन, परिवार, वाणी
तीसरा (सहज) साहस, छोटे भाई-बहन
चौथा (सुख) माता, घर, संपत्ति, सुख
पांचवां (पुत्र) संतान, बुद्धि, प्रेम
छठा (रिपु) शत्रु, रोग, कर्ज़, नौकरी
सातवां (कलत्र) विवाह, जीवनसाथी, साझेदारी
आठवां (आयु) आयु, अचानक घटनाएं, रहस्य
नौवां (धर्म) भाग्य, पिता, धर्म, उच्च शिक्षा
दसवां (कर्म) करियर, पद, प्रतिष्ठा
ग्यारहवां (लाभ) आय, लाभ, मित्र
बारहवां (व्यय) खर्च, विदेश, मोक्ष

चरण 4: हर भाव की राशि और उसका स्वामी

भाव में जो राशि है, उसका स्वामी ग्रह उस भाव का फल लेकर चलता है।

राशि स्वामी
मेष, वृश्चिक मंगल
वृषभ, तुला शुक्र
मिथुन, कन्या बुध
कर्क चंद्र
सिंह सूर्य
धनु, मीन गुरु
मकर, कुंभ शनि

चरण 5: ग्रहों की स्थिति देखें

नौ ग्रह छोटे रूप में लिखे होते हैं: सू (सूर्य), चं (चंद्र), मं (मंगल), बु (बुध), गु (गुरु), शु (शुक्र), श (शनि), रा (राहु), के (केतु)। ग्रह जिस भाव में बैठता है, उसे अपना स्वभाव देता है। जैसे सातवें भाव में मंगल कुंडली को मांगलिक बनाता है।

केंद्र (1, 4, 7, 10) और त्रिकोण (5, 9) भावों के ग्रह जीवन पर सबसे ज़्यादा असर डालते हैं।

चरण 6: चंद्र राशि, नक्षत्र और दशा

हमारी मुफ़्त कुंडली में ये तीनों, महादशा और अंतर्दशा की पूरी तालिका के साथ, दिखते हैं।

सार

किसी भी कुंडली को पहली बार ऐसे पढ़ें: लग्न और लग्नेश → मज़बूत भाव और उनके ग्रह → चंद्र राशि और नक्षत्र → चल रही दशा। योग, वर्ग कुंडली और गोचर इसके बाद आते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कुंडली में लिखे नंबर का क्या मतलब है?

उत्तर भारतीय कुंडली में नंबर भाव नहीं, राशि होते हैं: 1 मेष, 2 वृषभ से लेकर 12 मीन तक। भाव अपनी जगह स्थिर रहते हैं, ऊपर बीच वाला खाना हमेशा पहला भाव होता है।

कुंडली में शादी का भाव कौन सा है?

सातवां भाव विवाह और जीवनसाथी का मुख्य भाव है। इसके साथ शुक्र, दूसरा भाव (परिवार) और नवांश (D9) कुंडली भी देखी जाती है।

क्या कुंडली पढ़ने के लिए सही जन्म समय ज़रूरी है?

लग्न और भावों के लिए हाँ। लग्न लगभग हर दो घंटे में बदल जाता है, इसलिए गलत समय से सारे भाव बदल सकते हैं। चंद्र राशि और नक्षत्र पर समय का असर कम होता है।

ज्योतिष एक पारंपरिक मान्यता है। यह लेख केवल सामान्य जानकारी और मार्गदर्शन के लिए है, चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।